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मालाबार तटीय प्रदेश का भौगोलिक वर्गीकरण

प्रकरण: मालाबार तटीय प्रदेश का भौगोलिक वर्गीकरण परिचय: मालाबार तटीय प्रदेश भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक संकीर्ण तटीय मैदान है, जो मुख्यतः केरल राज्य तथा कर्नाटक के दक्षिणी भाग में फैला हुआ है। यह प्रदेश पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच स्थित है। इसे पश्चिमी तटीय मैदान का दक्षिणी भाग माना जाता है। 1. स्थिति एवं विस्तार उत्तर में: कर्नाटक का तटीय क्षेत्र दक्षिण में: कन्याकुमारी तक विस्तार पूर्व में: पश्चिमी घाट पश्चिम में: अरब सागर औसत चौड़ाई: लगभग 40–60 किमी लंबाई: लगभग 500 किमी 2. भौगोलिक वर्गीकरण मालाबार तटीय प्रदेश को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है— (क) तटीय मैदान (Coastal Plain) समुद्र के किनारे स्थित समतल एवं नीचा क्षेत्र। यहाँ रेतीली मिट्टी एवं जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। नारियल, चावल एवं मसालों की खेती प्रमुख। (ख) लैगून एवं बैकवाटर क्षेत्र (Lagoon & Backwaters) इस क्षेत्र की विशेषता वेम्बनाड झील, अष्टमुडी झील आदि हैं। समुद्र से आंशिक रूप से जुड़ी खाड़ी जैसे जलाशय। मत्स्य पालन एवं जल परिवहन का विकास। (ग) डेल्टा एवं नदीमुख क्षेत्र Delta and estuarine areas छोटी नदि...

International Trade

भारत में अंतरराष्ट्रीय व्यापार (Structure, Trends and Importance of India’s International Trade) 1. अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अर्थ जब कोई देश अन्य देशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है। 👉 भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः आयात (Imports) निर्यात (Exports) पर आधारित है। 2. भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार की संरचना (Structure of India’s International Trade) भारत के व्यापार की संरचना को निर्यात संरचना, आयात संरचना और व्यापारिक भागीदार देशों के आधार पर समझा जा सकता है। (क) भारत का निर्यात संरचना भारत के निर्यात में निम्न वस्तुएँ प्रमुख हैं— 1. कृषि एवं कृषि आधारित उत्पाद चावल चाय कॉफी मसाले कपास 2. औद्योगिक एवं विनिर्मित वस्तुएँ पेट्रोलियम उत्पाद इंजीनियरिंग सामान रसायन औषधियाँ ऑटोमोबाइल 3. खनिज एवं धातु लौह अयस्क एल्यूमिनियम अभ्रक 4. सेवाएँ (Services) आईटी सेवाएँ सॉफ्टवेयर बीपीओ पर्यटन (ख) भारत की आयात संरचना भारत के आयात में प्रमुख वस्तुएँ— कच्चा पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद सोना एवं चाँदी मशीनें और उपकरण इलेक्ट्रॉनिक सामान उ...

Regional Geography Kashmir Valley

कश्मीर घाटी का प्रादेशिक भूगोल (Regional Geography of Kashmir Valley) 1. कश्मीर घाटी का भौगोलिक परिचय कश्मीर घाटी भारत के जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित एक अत्यंत सुंदर एवं उपजाऊ अंतःपर्वतीय घाटी है। इसे भारत का “स्वर्ग” भी कहा जाता है। यह घाटी हिमालय पर्वत प्रणाली का भाग है। चारों ओर ऊँचे पर्वतों से घिरी हुई है। 2. स्थिति एवं विस्तार अक्षांश: 33° से 35° उत्तर देशांतर: 74° से 76° पूर्व लंबाई: लगभग 135 किमी चौड़ाई: 32 से 40 किमी औसत ऊँचाई: लगभग 1600 मीटर 3. भौतिक स्वरूप (Physiography) (क) पर्वतीय सीमाएँ उत्तर एवं पूर्व – महान हिमालय (Greater Himalaya) दक्षिण एवं पश्चिम – पीर पंजाल श्रेणी (ख) घाटी का स्वरूप कश्मीर घाटी एक समतल तली वाली चौड़ी घाटी है। घाटी के किनारों पर करेवा पठार पाए जाते हैं। घाटी का ढाल उत्तर-पश्चिम की ओर है। 4. भू-आकृतिक उत्पत्ति प्राचीन काल में कश्मीर घाटी एक विशाल झील थी। बाद में झेलम नदी द्वारा जल निकास हुआ। झील के अवसादों से उपजाऊ जलोढ़ मैदान तथा करेवा का निर्माण हुआ। 5. जलवायु कश्मीर घाटी की जलवायु समशीतोष्ण (Temperate) प्रकार की है। ग्...

Regional geography of Kashmir Valley

करेवा (Karewa)  करेवा क्या है? करेवा कश्मीर घाटी में पाए जाने वाले प्राचीन झीलों के अवसादी निक्षेप (Lake Deposits) हैं, जो घाटी की समतल भूमि से ऊँचे, सीढ़ीनुमा पठारों के रूप में दिखाई देते हैं। करेवा की उत्पत्ति भूवैज्ञानिक काल में कश्मीर घाटी एक विशाल झील थी। समय के साथ झील सूख गई और उसमें जमा मिट्टी, गाद, चिकनी मिट्टी और बजरी के अवसाद जम गए। बाद में अपरदन और भू-आकृतिक क्रियाओं से ये निक्षेप ऊँचे पठारी भागों के रूप में उभर आए, जिन्हें करेवा कहा जाता है। करेवा की प्रमुख विशेषताएँ ये सीढ़ीनुमा एवं समतल शीर्ष वाले पठार होते हैं। इनकी ऊँचाई लगभग 1500 से 1800 मीटर तक होती है। करेवा मुख्यतः कश्मीर घाटी के चारों ओर पाए जाते हैं। इनमें उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। करेवा का विस्तार श्रीनगर के आसपास बारामूला अनंतनाग पुलवामा बडगाम (कश्मीर घाटी के किनारी भागों में) करेवा का आर्थिक एवं कृषि महत्व करेवा मिट्टी केसर (Saffron) की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा उगाई जाने वाली फसलें— गेहूँ जौ मक्का बादाम और सेब (कुछ क्षेत्रों में) 👉 पंपोर का केसर विश्व-प्रसिद्ध है और यह करेवा भूमि पर ही उग...

जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व

भारत में जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व  1. भारत में जनसंख्या वृद्धि (Population Growth in India) जनसंख्या वृद्धि का अर्थ किसी निश्चित समयावधि में जनसंख्या में होने वाली वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। भारत में जनसंख्या वृद्धि की स्थिति भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। 1901 से 1921 तक वृद्धि धीमी रही (उच्च मृत्यु दर के कारण)। 1921 के बाद तीव्र वृद्धि शुरू हुई जिसे जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है। जनसंख्या वृद्धि के कारण मृत्यु दर में कमी – चिकित्सा सुविधाओं में सुधार जन्म दर अधिक – सामाजिक-धार्मिक कारण अशिक्षा गरीबी परिवार नियोजन की जानकारी का अभाव जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव बेरोजगारी गरीबी खाद्य समस्या आवास व स्वास्थ्य समस्याएँ 2. भारत में जनसंख्या वितरण (Population Distribution in India) जनसंख्या वितरण का अर्थ देश के विभिन्न भागों में जनसंख्या के फैलाव को जनसंख्या वितरण कहते हैं। भारत में जनसंख्या का असमान वितरण भारत में जनसंख्या समान रूप से वितरित नहीं है। अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान तटीय मैदान महानगर क्षेत्र (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता) कम जन...

MCQ भारत का भूगोल

  भारत का भूगोल   अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न  भारत का भूगोल – 50 अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न 1. भारत का अक्षांशीय विस्तार क्या है? 8°4' N से 37°6' N तक। 2. भारत का देशांतर विस्तार क्या है? 68°7' E से 97°25' E तक। 3. भारत किस गोलार्ध में स्थित है? भारत उत्तरी एवं पूर्वी गोलार्ध में स्थित है। 4. भारत का क्षेत्रफल कितना है? लगभग 32.87 लाख वर्ग किमी। 5. भारत का आकार किस प्रकार का है? त्रिभुजाकार उपमहाद्वीप। 6. भारत की मुख्य भूमि की तटरेखा कितनी है? लगभग 6,100 किमी। 7. भारत का मानक समय किस देशांतर पर आधारित है? 82°30' पूर्व देशांतर। 8. भारतीय उपमहाद्वीप किस प्लेट पर स्थित है? इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट पर। 9. भारत की सर्वोच्च चोटी कौन-सी है? कंचनजंगा (8,586 मी.)। 10. हिमालय की तीन प्रमुख श्रेणियाँ कौन-सी हैं? शिवालिक, लघु हिमालय, महान हिमालय। 11. गंगा नदी का उद्गम स्थल क्या है? गंगोत्री ग्लेशियर, उत्तराखंड। 12. नर्मदा नदी कहाँ गिरती है? अरब सागर में। 13. ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम कहाँ है? मानसरोवर के पास चेमा-युंगडुंग ग्लेशियर। 14. भारत की सबसे बड़ी ...

Chhota Nagpur Plateau

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय  (Semester III) – Geography of India  “छोटा नागपुर पठार (Chhota Nagpur Plateau)”  🗺️ छोटा नागपुर पठार (Chhota Nagpur Plateau) 🔶 परिचय (Introduction) छोटा नागपुर पठार भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है। यह भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक प्राचीन भू-भाग (Ancient Landmass) है, जो खनिज संपदाओं, वन सम्पदा, और औद्योगिक विकास के लिए प्रसिद्ध है। इसे “भारत का खनिज भंडार” (Storehouse of Minerals) भी कहा जाता है। --- 🔶 स्थिति एवं विस्तार (Location and Extension) छोटा नागपुर पठार मुख्यतः झारखण्ड राज्य में फैला हुआ है। इसका कुछ भाग ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ में भी विस्तृत है। अक्षांशीय विस्तार: लगभग 21°30′ उत्तरी से 25° उत्तरी अक्षांश तक। देशांतर विस्तार: लगभग 83° पूर्व से 88° पूर्व देशांतर तक। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर है। --- 🔶 भू-आकृतिक संरचना (Geological Structure) यह पठार प्राचीन गोंडवाना भू-भाग का हिस्सा है। इसकी संरचना मुख्यतः आग्नेय (Igneous) और रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों से बनी है। यहाँ ग्र...