Chhota Nagpur Plateau

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय 

(Semester III) – Geography of India 

“छोटा नागपुर पठार (Chhota Nagpur Plateau)” 


🗺️ छोटा नागपुर पठार (Chhota Nagpur Plateau)

🔶 परिचय (Introduction)

छोटा नागपुर पठार भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है।

यह भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक प्राचीन भू-भाग (Ancient Landmass) है, जो खनिज संपदाओं, वन सम्पदा, और औद्योगिक विकास के लिए प्रसिद्ध है।


इसे “भारत का खनिज भंडार” (Storehouse of Minerals) भी कहा जाता है।



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🔶 स्थिति एवं विस्तार (Location and Extension)


छोटा नागपुर पठार मुख्यतः झारखण्ड राज्य में फैला हुआ है।


इसका कुछ भाग ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ में भी विस्तृत है।


अक्षांशीय विस्तार: लगभग 21°30′ उत्तरी से 25° उत्तरी अक्षांश तक।


देशांतर विस्तार: लगभग 83° पूर्व से 88° पूर्व देशांतर तक।


इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर है।




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🔶 भू-आकृतिक संरचना (Geological Structure)


यह पठार प्राचीन गोंडवाना भू-भाग का हिस्सा है।


इसकी संरचना मुख्यतः आग्नेय (Igneous) और रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों से बनी है।


यहाँ ग्रेनाइट, गनीस, शिस्ट, बेसाल्ट आदि चट्टानें पाई जाती हैं।


पठार का निर्माण अत्यंत प्राचीन युग — आर्कियन युग (Archean Era) में हुआ था।




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🔶 ऊँचाई एवं स्थलरूप (Relief and Topography)


पठार की औसत ऊँचाई 700 से 1,000 मीटर तक है।


यह पश्चिम से पूर्व की ओर धीरे-धीरे ढलान लिए हुए है।


यहाँ अनेक छोटे-बड़े पहाड़, घाटियाँ और जलप्रपात (Waterfalls) पाए जाते हैं।


प्रमुख चोटियाँ —


पारसनाथ पहाड़ी (1,366 मी.) – झारखण्ड की सबसे ऊँची चोटी।


राजमाहल पहाड़ियाँ (उत्तर-पूर्व में)।


माइकल पहाड़ियाँ (दक्षिण-पश्चिम भाग में)।





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🔶 जल निकासी प्रणाली (Drainage System)


छोटा नागपुर पठार से अनेक नदियाँ निकलती हैं, जिनमें प्रमुख हैं —


नदी का नाम बहाव दिशा प्रमुख विशेषताएँ


दामोदर नदी पश्चिम से पूर्व “रूर ऑफ बंगाल” कहा जाता है, जलप्रपात और बाँध निर्माण के लिए प्रसिद्ध।

स्वर्णरेखा नदी दक्षिण से पूर्व झारखण्ड और ओडिशा से होकर बहती है।

सुबर्णरेखा नदी पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

कोएल और शंख नदी दक्षिण-पश्चिम भाग में सोन और गंगा नदी की सहायक नदियाँ हैं।



प्रसिद्ध जलप्रपात —


हुंडरू जलप्रपात (Hundru Falls) — दामोदर की सहायक स्वर्णरेखा नदी पर।


दशम जलप्रपात, हिरणी जलप्रपात, जोनहा जलप्रपात आदि।




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🔶 जलवायु (Climate)


यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) है।


ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल–जून) में तापमान 40°C तक पहुँच जाता है।


वर्षा ऋतु (जुलाई–सितंबर)




🔶 स्थिति एवं विस्तार (Location and Extension)


छोटा नागपुर पठार मुख्यतः झारखण्ड राज्य में फैला हुआ है।


इसका कुछ भाग ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ में भी विस्तृत है।


अक्षांशीय विस्तार: लगभग 21°30′ उत्तरी से 25° उत्तरी अक्षांश तक।


देशांतर विस्तार: लगभग 83° पूर्व से 88° पूर्व देशांतर तक।


इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 65,000 वर्ग किलोमीटर है।




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🔶 भू-आकृतिक संरचना (Geological Structure)


यह पठार प्राचीन गोंडवाना भू-भाग का हिस्सा है।


इसकी संरचना मुख्यतः आग्नेय (Igneous) और रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों से बनी है।


यहाँ ग्रेनाइट, गनीस, शिस्ट, बेसाल्ट आदि चट्टानें पाई जाती हैं।


पठार का निर्माण अत्यंत प्राचीन युग — आर्कियन युग (Archean Era) में हुआ था।




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🔶 ऊँचाई एवं स्थलरूप (Relief and Topography)


पठार की औसत ऊँचाई 700 से 1,000 मीटर तक है।


यह पश्चिम से पूर्व की ओर धीरे-धीरे ढलान लिए हुए है।


यहाँ अनेक छोटे-बड़े पहाड़, घाटियाँ और जलप्रपात (Waterfalls) पाए जाते हैं।


प्रमुख चोटियाँ —


पारसनाथ पहाड़ी (1,366 मी.) – झारखण्ड की सबसे ऊँची चोटी।


राजमाहल पहाड़ियाँ (उत्तर-पूर्व में)।


माइकल पहाड़ियाँ (दक्षिण-पश्चिम भाग में)।





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🔶 जल निकासी प्रणाली (Drainage System)


छोटा नागपुर पठार से अनेक नदियाँ निकलती हैं, जिनमें प्रमुख हैं —


नदी का नाम बहाव दिशा प्रमुख विशेषताएँ


दामोदर नदी पश्चिम से पूर्व “रूर ऑफ बंगाल” कहा जाता है, जलप्रपात और बाँध निर्माण के लिए प्रसिद्ध।

स्वर्णरेखा नदी दक्षिण से पूर्व झारखण्ड और ओडिशा से होकर बहती है।

सुबर्णरेखा नदी पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में मिलती है।

कोएल और शंख नदी दक्षिण-पश्चिम भाग में सोन और गंगा नदी की सहायक नदियाँ हैं।



प्रसिद्ध जलप्रपात —


हुंडरू जलप्रपात (Hundru Falls) — दामोदर की सहायक स्वर्णरेखा नदी पर।


दशम जलप्रपात, हिरणी जलप्रपात, जोनहा जलप्रपात आदि।




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🔶 जलवायु (Climate)


यहाँ की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) है।


ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल–जून) में तापमान 40°C तक पहुँच जाता है।


वर्षा ऋतु (जुलाई–सितंबर) में औसत वर्षा 120–150 सेमी होती है।


शीत ऋतु (दिसंबर–फरवरी) में तापमान लगभग 10°C तक गिर जाता है।




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🔶 वनस्पति और जीव-जंतु (Vegetation and Wildlife)


यहाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests) पाए जाते हैं।


प्रमुख वृक्ष — साल (Sal), शीशम, सागौन (Teak), बांस, महुआ, अर्जुन।


वन्य जीव — हाथी, बाघ, हिरण, भालू, तेंदुआ आदि।


पालामऊ अभयारण्य (Palamau Sanctuary) और बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park) यहाँ के प्रसिद्ध वन्य क्षेत्र हैं।




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🔶 खनिज संपदा (Mineral Resources)


छोटा नागपुर पठार को “भारत का खनिज भंडार (Mineral Storehouse of India)” कहा जाता है क्योंकि यहाँ निम्नलिखित प्रमुख खनिज पाए जाते हैं —


खनिज प्रमुख क्षेत्र


लौह अयस्क (Iron Ore) सिंहभूम (झारखण्ड), केओंजार (ओडिशा)

कोयला (Coal) दामोदर घाटी क्षेत्र – झरिया, बोकारो, गिरिडीह

ताँबा (Copper) हजारीबाग, सिंहभूम

मैंगनीज (Manganese) रांची, गुड़ुवा क्षेत्र

बॉक्साइट (Bauxite) लोहरदगा, पलामू

यूरेनियम जादूगोड़ा (झारखण्ड)




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🔶 कृषि (Agriculture)


भूमि अधिकतर पथरीली और उबड़-खाबड़ है, इसलिए सिंचाई सीमित है।


खेती मुख्यतः वर्षा आधारित (Rainfed) होती है।


प्रमुख फसलें — चावल, मक्का, ज्वार, दालें, आलू, तिलहन आदि।




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🔶 उद्योग (Industries)


खनिज संपदा के कारण यहाँ कई प्रमुख उद्योग विकसित हुए हैं —


इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) — जमशेदपुर (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी)।


कोयला उद्योग (Coal Industry) — झरिया, धनबाद।


एल्यूमिनियम, ताँबा, मशीन उपकरण, और बिजली उत्पादन उद्योग।


बोकारो, रांची, धनबाद, जमशेदपुर औद्योगिक नगर हैं।




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🔶 जनसंख्या और जनजीवन (Population and People)


यहाँ की जनसंख्या का बड़ा भाग आदिवासी समुदायों का है — संथाल, मुण्डा, उरांव, हो, और खारिया।


उनकी आजीविका का मुख्य साधन — कृषि, खनन कार्य, और वनों पर निर्भरता।


सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से यह क्षेत्र भारत की जनजातीय संस्कृति का केंद्र है।




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🔶 समस्याएँ (Problems)


1. वनों की अंधाधुंध कटाई।



2. खनन से पर्यावरण प्रदूषण।



3. भूमि अपरदन और जल स्रोतों का क्षय।



4. जनजातीय गरीबी और शिक्षा की कमी।



5. असमान औद्योगिक विकास।





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🔶 महत्त्व (Significance)


भारत का प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्र।


ऊर्जा संसाधनों का स्रोत।


वन संपदा और जल संसाधनों का भंडार।


भारत के पूर्वी औद्योगिक पट्टी (Eastern Industrial Belt) की नींव।


🔶 निष्कर्ष (Conclusion)

छोटा नागपुर पठार प्राकृतिक संपदाओं से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है।

यह भारत की औद्योगिक प्रगति का मूल आधार है, लेकिन यहाँ के प्राकृतिक और मानव संसाधनों का संतुलित विकास आवश्यक है।

यदि उचित योजना, पर्यावरणीय संरक्षण और जनसहभागिता के साथ विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति में एक सशक्त स्तंभ बन सकता है।


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