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Showing posts from July, 2025

Unit I 4.Soil Classification

प्रकरण: Soil Classification, Problems Associated with Soil and Their Remedies in India विषय: मृदा का वर्गीकरण, मृदा से संबंधित समस्याएँ एवं भारत में उनके समाधान 1. मृदा का परिचय (Introduction to Soil) मृदा (Soil) पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली वह प्राकृतिक, गतिशील एवं जीवंत परत है, जिसमें खनिज पदार्थ, जैविक पदार्थ, जल, वायु तथा विभिन्न सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं और जो वनस्पतियों की वृद्धि के लिए आधार प्रदान करती है। मृदा केवल कृषि का आधार नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, जल चक्र और पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मृदा के प्रमुख घटक 1. खनिज पदार्थ — लगभग 45% 2. मृदा जल — लगभग 25% 3. मृदा वायु — लगभग 25% 4. जैविक पदार्थ — लगभग 5% > ये प्रतिशत सामान्य आदर्श मृदा के अनुमानित अनुपात हैं; वास्तविक अनुपात स्थान एवं परिस्थितियों के अनुसार बदलता है। --- 2. भारत में मृदा निर्माण के कारक भारत में विभिन्न प्रकार की मृदाएँ मिलने का प्रमुख कारण भौतिक एवं जैविक परिस्थितियों की विविधता है। प्रमुख कारक 1. जलवायु (Climate) तापमान एवं वर्षा अपक्षय, निक्षालन और मृदा...

Unit I 3. Climate and Climate Divisions

Climate and Climate Divisions जलवायु एवं जलवायु प्रदेश 1. जलवायु का अर्थ किसी स्थान के तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता, बादल और वर्षा जैसी वायुमंडलीय दशाओं के दीर्घकालीन औसत एवं उनके परिवर्तनशील स्वरूप को जलवायु (Climate) कहा जाता है। सरल शब्दों में— > किसी स्थान के मौसम की दीर्घकालीन औसत दशा जलवायु कहलाती है। मौसम और जलवायु में अंतर आधार मौसम (Weather) जलवायु (Climate) अर्थ अल्पकालीन वायुमंडलीय दशा दीर्घकालीन औसत दशा अवधि घंटे, दिन या सप्ताह सामान्यतः कई दशकों का रिकॉर्ड परिवर्तन बहुत तेजी से बदलता है धीरे-धीरे परिवर्तन उदाहरण आज वर्षा हो रही है राजस्थान की जलवायु शुष्क है अध्ययन मौसम विज्ञान जलवायु विज्ञान 2. जलवायु के प्रमुख तत्व जलवायु का अध्ययन मुख्यतः निम्न तत्वों के आधार पर किया जाता है— 1. तापमान वायुमंडल की गर्मी या ठंडक की मात्रा। 2. वायुदाब वायुमंडल द्वारा पृथ्वी की सतह पर लगाया गया दबाव। 3. पवन उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर वायु की गति। 4. आर्द्रता वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा। 5. वर्षण वायुमंडल से जल का विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर गिरना। उदाहरण: वर्षा हिमपात ...

Unit I 2. Drainage System of India

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर भारत का भूगोल — Drainage System of India भारत की अपवाह तंत्र / नदी तंत्र 1. अपवाह तंत्र का अर्थ किसी क्षेत्र की नदियों, सहायक नदियों, जलधाराओं तथा उनके द्वारा निर्मित जल-प्रवाह के समग्र जाल को अपवाह तंत्र (Drainage System) कहा जाता है। किसी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जिस क्षेत्र से जल एकत्रित किया जाता है, उसे अपवाह बेसिन (Drainage Basin) कहते हैं। महत्वपूर्ण शब्द जल विभाजक (Water Divide): दो अपवाह बेसिनों को अलग करने वाली ऊँची भूमि या पर्वतीय क्षेत्र जल विभाजक कहलाता है। नदी तंत्र (River System): मुख्य नदी तथा उसकी सभी सहायक एवं सहायक की सहायक नदियों के समूह को नदी तंत्र कहते हैं। 2. भारत के अपवाह तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ भारत का अपवाह तंत्र अत्यंत विविध है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं— 1. भारत की अधिकांश बड़ी नदियों का उद्गम पर्वतीय क्षेत्रों से होता है। 2. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सामान्यतः बारहमासी (Perennial) हैं। 3. प्रायद्वीपीय नदियों का अधिकांश प्रवाह वर्षा पर निर्भर करता है। 4. भारत की नदियों का एक बड़ा भाग बंगाल की खाड़ी में...

Unit I 1 Physiography भारत के भौतिक प्रदेश

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर भारत का भूगोल (Geography of India) A Study of India with Reference to its Physiography भारत का भौतिक स्वरूप / भौतिक विभाग प्रस्तुतकर्ता: डॉ. नवीन कुमार पारीक व्याख्याता, भूगोल 1. प्रस्तावना भारत विविध भौतिक स्वरूपों वाला देश है। यहाँ उत्तर में विशाल एवं नवीन हिमालय पर्वत, उत्तर-पश्चिम में भारतीय मरुस्थल, उत्तर एवं मध्य भारत में विस्तृत उत्तरी मैदान, दक्षिण में प्राचीन प्रायद्वीपीय पठार, पूर्व एवं पश्चिम में तटीय मैदान तथा समुद्र में द्वीप समूह पाए जाते हैं। भारत की वर्तमान भौतिक संरचना करोड़ों वर्षों की भूगर्भिक प्रक्रियाओं, प्लेट विवर्तनिकी, अपरदन, निक्षेपण एवं जलवायु संबंधी प्रक्रियाओं का परिणाम है। भारत के प्रमुख भौतिक विभाग भारत को सामान्यतः निम्न छह प्रमुख भौतिक विभागों में बाँटा जाता है— 1. उत्तरी एवं उत्तर-पूर्वी पर्वतीय प्रदेश 2. उत्तरी विशाल मैदान 3. प्रायद्वीपीय पठार 4. भारतीय मरुस्थल 5. तटीय मैदान 6. द्वीप समूह भारत की भौगोलिक स्थिति भारत एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है। अक्षांशीय विस्तार: लगभग 8°4' उत्तरी अक्षांश से 37°6...